ब्रह्माण्ड पुराण में वर्णित पौष कृष्ण पक्ष की सफला एकादशी की पावन कथा, जिसमें राजा महिष्मान के पापी पुत्र लुम्पक का अनजाने में किए गए व्रत से उद्धार हुआ और समस्त कार्य 'सफल' हुए।