यह तमिल भाषा में रचित एक भक्ति गीत है, जिसमें भगवान कृष्ण (नारायण) की स्तुति की गई है। इसे मार्गशीर्ष महीने में सुबह-सुबह नदी या तालाब में स्नान करते समय गाया जाता है, और इसमें गोपियाँ भगवान से उनकी कृपा और वरदान माँगती हैं।
यह एक पवित्र कवच (रक्षा स्तोत्र) है, जो भगवान मुरुगन (कंदा) की स्तुति में रचा गया है। इसके नियमित पाठ से भक्तों को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक सुरक्षा मिलती है, तथा जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं।