यह एक भक्तिपूर्ण स्तोत्र है जिसकी रचना श्री वेदान्तदेशिक ने की है। इसमें भगवान अच्युत (विष्णु) को सत्य और शरण के रूप में वर्णित किया गया है, तथा उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए विनम्र भाव से प्रार्थना की गई है।