यह बौद्ध धर्म का सबसे प्रमुख शरण-मंत्र है, जिसमें व्यक्ति बुद्ध, उनकी शिक्षा (धम्म) और उनके संघ (समुदाय) की शरण लेता है। इसे तीन बार दोहराकर अपनी आस्था और समर्पण व्यक्त किया जाता है।