कैसे राजा इंद्रद्युम्न ने जगन्नाथ, बलभद्र तथा सुभद्रा की दिव्य प्रतिमाओं का निर्माण करवाया, तथा दिव्य शिल्पी विश्वकर्मा ने उन्हें सदा के लिए हाथ-पैर रहित क्यों छोड़ा, इसकी कथा।
यह एक भक्ति गीत है जो भगवान विश्वकर्मा की स्तुति करता है, उन्हें सृष्टि का निर्माता और रक्षक बताता है। इसमें बताया गया है कि उनकी आराधना से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और उन्हें सुख, शांति तथा सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।