ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद के प्रामाणिक मंत्र एवं सूक्त — मूल पाठ, उच्चारण और अर्थ सहित 28 भाषाओं में।
पुरुषसूक्त (ऋग्वेद १०.९०): विराट् पुरुष का वैदिक स्तोत्र, जिसके यज्ञ से लोकों और वेदों की उत्पत्ति बताई गई है।
श्रीसूक्त, ऋग्वेद के खिल भाग का स्तोत्र, जो जातवेदस् (अग्नि) के माध्यम से लक्ष्मी का आह्वान कर समृद्धि और कृपा माँगता है।