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Embroidered artwork for रणकपुर-जैनमन्दिरम्: चतुश्चत्वारिंशदधिक-चतुर्दशशत-स्तम्भोपेतं पावनजिनालयम्: Embroidered Jain ahimsa palm with a gold wheel, white marble temples and lotuses at dawn

रणकपुर-जैनमन्दिरम्

चतुश्चत्वारिंशदधिक-चतुर्दशशत-स्तम्भोपेतं पावनजिनालयम्

रणकपुर-जैनमन्दिरम्

चतुश्चत्वारिंशदधिक-चतुर्दशशत-स्तम्भोपेतं पावनजिनालयम्

राजस्थानराज्ये अरावलीपर्वतमालायां स्थितं चतुर्मुखं श्रीऋषभदेव-जिनालयम्।

नलिनी-गुल्म विमान की पावन परिकल्पना

१५वीं शताब्दी में परम धर्मनिष्ठ जैन श्रेष्ठी धरना शाह ने ध्यान में नलिनी-गुल्म नामक दिव्य स्वर्गीय विमान का साक्षात्कार किया। मेवाड़ के प्रतापी महाराणा कुंभा के संरक्षण और शिल्पी देपा के मार्गदर्शन में ५० वर्षों के अथक परिश्रम के पश्चात १४३९ ई. में यह पावन जिनालय प्रतिष्ठित हुआ।

मंदिर को 'चौमुखा' (चार मुख वाला) बनाया गया है ताकि भगवान आदिनाथ का पावन दर्शन चारों दिशाओं से प्राप्त हो सके, जो यह दर्शाता है कि तीर्थंकर का केवलज्ञान संपूर्ण ब्रह्मांड को प्रकाशित करता है।

रणकपुर के प्रमुख पावन अंग

१,४४४ संगमरमरी खंभे
शिल्प व स्वरूप:अत्यंत सूक्ष्म नक्काशी, कोई भी दो एक समान नहीं
आध्यात्मिक माहात्म्य:विविधता में एकता और सत्य के आधार का प्रतीक।
चौमुखा गर्भगृह
शिल्प व स्वरूप:भगवान आदिनाथ की ६ फीट ऊंची चतुर्मुख प्रतिमा
आध्यात्मिक माहात्म्य:समवसरण का प्रतीक जहाँ तीर्थंकर सभी जीवों को समान भाव से उपदेश देते हैं।
अधोमुखी कमल शिखर
शिल्प व स्वरूप:संगमरमर के उल्टे लटकते कमल पुष्प
आध्यात्मिक माहात्म्य:सांसारिक मोह-माया से अलिप्त रहने का संदेश।
१०८ फणों वाले पार्श्वनाथ
शिल्प व स्वरूप:एक ही शिला पर उत्कीर्ण सर्प छत्र
आध्यात्मिक माहात्म्य:अटूट एकाग्रता और उपसर्ग विजय का पावन प्रतीक।

पावन क्षमापना सूत्र

जैन धर्म का अमर मैत्री मंत्र:

खमेमि सव्वे जीवे

सव्वे जीवा खमंतु मे।

मेत्ती मे सव्व भूएसु

वेरं मज्झं न केणइ॥

ज्ञातव्य-विशेषः

No Two Pillars are Identical

Among all 1,444 pillars in the temple complex, every single column features a completely distinct sculptural motif.

Color Changing Marble

The translucent Makrana marble of Ranakpur subtly changes its hue from golden cream at dawn to bright white at noon and soft peach at sunset.

The Mystery Pillar

To guard against human pride (Ahankara), the architect intentionally left one single pillar slightly tilted out of true alignment.

Ray of Sunlight on the Idol

On every full moon day, a shaft of natural sunlight filters directly onto the face of the central Adinath idol.

Rishabhanatha सम्पूर्णा स्तुतिः पाठाश्च

Rishabhanatha

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सम्बद्धशिक्षाः

सैव शिक्षा, विविधपरम्परासु प्रतिध्वनिता