चतुर्वर्ग
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
चतुर्विध समूह
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'चतुर्' (चार) और 'वर्ग' (समूह, श्रेणी) से बना; चार पुरुषार्थों — धर्म, अर्थ, काम, तथा मोक्ष — हेतु सामूहिक शब्द, जिन्हें पूर्ण मानव जीवन हेतु एक ही, एकीकृत ढाँचे के रूप में साथ माना जाता है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
सभी चार लक्ष्यों को चढ़ने योग्य पदानुक्रम के बजाय एकीकृत चतुर्वर्ग के रूप में प्रस्तुत करना मानव उत्कर्ष के समग्र दृष्टिकोण को दर्शाता है — नैतिकता, समृद्धि, आनंद, तथा मुक्ति को साथ बुना जाना है, अलगाव में एक के बाद एक अपनाया जाना नहीं।