दासोह
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
अपनी कमाई में से समाज और जरूरतमंदों को निःस्वार्थ समर्पण
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'दासोऽहम्' (मैं सबका सेवक हूँ)।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
श्रम से अर्जित धन को दूसरों की सेवा में अर्पित करने का दिव्य भाव।