गायत्री
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
गाने वाले की रक्षा करने वाली वेदमाता
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'गै' (गाना) + 'त्रै' (रक्षा करना) — गायन्तं त्रायते यस्मात्।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
परमब्रह्म के तेजोमय स्वरूप का ध्यान कर बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करने वाला महामंत्र।