पुरुषार्थ
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
मानव जीवन के लक्ष्य
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'पुरुष' (व्यक्ति) और 'अर्थ' (लक्ष्य, उद्देश्य) से बना; मानव जीवन के चार वैध लक्ष्य — धर्म (नैतिकता), अर्थ (समृद्धि), काम (आनंद), तथा मोक्ष (मुक्ति) — संतुलन में अपनाए जाने हेतु।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
उन परंपराओं के विपरीत जो आनंद तथा धन को आध्यात्मिक रूप से संदिग्ध मानती हैं, हिंदू विचारधारा अर्थ तथा काम को वैध लक्ष्यों के रूप में मान्यता देती है, बशर्ते वे धर्म में स्थिर रहें तथा अंततः मोक्ष का मार्ग बनाएँ।