सचखंड
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
सत्य का क्षेत्र
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'सच' (सत्य) + 'खंड' (क्षेत्र, भाग) से — अस्तित्व का अंतिम, सर्वोच्च आध्यात्मिक क्षेत्र जहां आत्मा प्रत्यक्ष रूप से सच्चे ईश्वर का अनुभव करती है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
गुरु रविदास जी का बेगमपुरा सचखंड के समानांतर है — दुःख, भय, तथा भेदभाव से रहित एक सामाजिक-आध्यात्मिक आदर्श, जहां प्रत्येक आत्मा एक समान नागरिक है।