साखी
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
प्रत्यक्ष अनुभव से निकली सत्यवाणी — दोहा
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'साक्षी' (प्रत्यक्ष दृष्टा)।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
कबीर के वे अनमोल दोहे जो जीवन के गूढ़ सत्यों को सहज भाषा में समझाते हैं।
प्रत्यक्ष अनुभव से निकली सत्यवाणी — दोहा
संस्कृत 'साक्षी' (प्रत्यक्ष दृष्टा)।
कबीर के वे अनमोल दोहे जो जीवन के गूढ़ सत्यों को सहज भाषा में समझाते हैं।
कबीर की साखी, शब्द, तथा रमैनी
कबीर पंथ के भक्त चदरिया झीनी रे झीनी जैसे भजन गाने हेतु सत्संग में एकत्रित होते हैं, साझा भक्ति गायन के माध्यम से जीवन की नश्वरता पर चिंतन करते हुए।
संत कबीर के दो-पंक्ति दोहों तथा साखियों का जाप तथा चिंतन दैनिक जीवन में तत्काल आत्म-अवलोकन, विनम्रता, तथा शांति प्रदान करता है।
भारत का पावन आध्यात्मिक पुनर्जागरण
वाराणसी में संत कबीर का निवास तथा उपदेश स्थल