संगत
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
पवित्र संगत
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'संगति' (साथ) से; गुरुओं ने साझा उपासना हेतु एकत्रित सिखों के समूह के लिए प्रयोग किया।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
संगत में बैठना अहंकार मिटाता है और सामूहिक भक्ति को व्यक्तिगत साधना से ऊपर रखता है।