सतगुरु
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
सत्य का साक्षात्कार कराने वाले परम मार्गदर्शक
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'सत्' (अविनाशी सत्य) + 'गुरु'।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
वह गुरु जो शिष्य के अज्ञान को मिटाकर उसे वास्तविक आत्म-ज्ञान प्रदान करते हैं।