Bharat Devotion

षट्स्थल

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

छह स्थितियां

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

'षट्' (छह) + 'स्थल' (स्थिति) से — भक्त, महेश, प्रसादी, प्राणलिंगी, शरण, तथा ऐक्य नामक छह क्रमिक अवस्थाओं के माध्यम से आत्मा की शिव के साथ एकत्व की प्रगति।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

शिवशरण कवियों की वचनाओं में मिलने वाला षट्स्थल, आध्यात्मिक विकास को एकल घटना के बजाय क्रमिक, आजीवन प्रक्रिया के रूप में चित्रित करता है।

षट्स्थल का उल्लेख इन लेखों में