कूडलसंगम
वह नदी संगम जहाँ बसवण्णा ने ऐक्य प्राप्त किया
कर्नाटक में कृष्णा तथा मलप्रभा नदियों का पवित्र संगम कूडलसंगम, वह स्थल माना जाता है जहाँ बसवण्णा ने अपने अंतिम दिन बिताए तथा ऐक्य (शिव के साथ आध्यात्मिक एकत्व) प्राप्त किया। यह आज भी लिंगायत तीर्थयात्रा के सबसे महत्वपूर्ण गंतव्यों में से एक है।
एक पवित्र संगम
कर्नाटक के बागलकोट जिले में जहाँ कृष्णा तथा मलप्रभा नदियाँ मिलती हैं, वहाँ स्थित कूडलसंगम ("जलों का मिलन") शिव भक्ति के लिए दीर्घकाल से पवित्र रहा है — इसका संगमेश्वर मंदिर बसवण्णा के समय से भी पूर्व का है। बसवकल्याण के अनुभव मंटप सुधारों के बाद हुई सामाजिक उथल-पुथल के पश्चात बसवण्णा अपने अंतिम वर्षों में इसी संगम में एकांतवास हेतु गए थे।
ऐक्य की प्राप्ति
लिंगायत परंपरा के अनुसार बसवण्णा ने कूडलसंगम में ऐक्य — शिव के साथ आध्यात्मिक एकत्व, जिसे लिंगायत परंपरा में सामान्य अर्थ में मृत्यु के बजाय विलय के रूप में समझा जाता है — प्राप्त किया। स्थल का ऐक्य मंटप इस घटना का स्मारक है।
लिंगायत तीर्थयात्रा का जीवंत केंद्र
आज कूडलसंगम लिंगायत समुदाय के प्राथमिक तीर्थ तथा संस्थागत केंद्र के रूप में कार्यरत है, जहाँ बसव जयंती समारोह तथा एक आधुनिक सांस्कृतिक परिसर इसके प्राचीन मंदिर के साथ-साथ स्थित हैं।
क्या आप जानते हैं?
संगम पर स्थित संगमेश्वर मंदिर बसवण्णा से भी शताब्दियों पूर्व का है, अर्थात उन्होंने अपने अंतिम वर्षों हेतु एक नए स्थल के बजाय पहले से ही पवित्र स्थल को चुना।
कर्नाटक के आधिकारिक पर्यटन तथा सरकारी संदर्भों में इस स्थल को कभी-कभी 'कूडल संगम' (दो शब्दों में) भी लिखा जाता है।
कर्नाटक सरकार ने कूडलसंगम में एक विशाल स्मारक तथा संग्रहालय परिसर विकसित किया है, जो राज्य के सामाजिक तथा साहित्यिक इतिहास में बसवण्णा की मूलभूत भूमिका को दर्शाता है।
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