वाहेगुरु
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
विस्मयकारी परमात्मा जो अज्ञान के अंधकार को मिटाते हैं
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
गुरमुखी 'ਵਾਹਿ' (अद्भुत/अगम्य) तथा 'ਗੁਰੂ' (प्रकाशक) से बना।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
सिख धर्म का मूल मंत्र, जो परमात्मा की असीम महिमा के प्रति विस्मय तथा कृतज्ञता व्यक्त करता है।