फिल्म 'संत ज्ञानेश्वर' (1964) का भरत व्यास-रचित भजन, जो प्रेम-प्रकाश फैलाने और सबमें एक ही आत्मा देखने की प्रेरणा देता है।
संत ज्ञानदेव का ‘मोगरा फुलला’: हृदय के द्वार पर रोपी गई चमेली आकाश तक चढ़ती है, और उसके पुष्प भगवान विट्ठल को अर्पित शाल में गूँथे जाते हैं।
संत मुक्ताबाई का ‘ताटी उघडा ज्ञानेश्वरा’: अपने भाई ज्ञानदेव से झोंपड़ी का द्वार खोलने की विनती, यह सिखाते हुए कि सच्चा संत संसार के ताने करुणा से सहता है।