महा-कृष्ण श्वान और धर्म का शंखनाद
बढ़ई और चढ़ता समुद्र
यह धम्मपद का दूसरा अध्याय है, जिसमें भगवान बुद्ध सिखाते हैं कि सजगता और सावधानी (अप्रमाद) ही अमृत पद अर्थात् निर्वाण का मार्ग है, जबकि लापरवाही (प्रमाद) मृत्यु और दुःख का द्वार है।