बृहदारण्यक उपनिषद् 1.3.28 की पवमान प्रार्थना: मुझे असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर और मृत्यु से अमृत की ओर ले चलो।
उपनिषद् का शांति मंत्र 'सह नाववतु': गुरु और शिष्य साथ मिलकर रक्षा, पोषण, बल और वैर-रहित अध्ययन की प्रार्थना करते हैं।
श्वेत वस्त्रधारी, चन्द्रवर्ण, चतुर्भुज, प्रसन्नमुख प्रभु का ध्यान-श्लोक, जो पूजा या अध्ययन से पहले सब विघ्न शांत करने के लिए पढ़ा जाता है।
गणेश जी की प्रिय प्रार्थना: वक्रतुण्ड, महाकाय, करोड़ सूर्यों के तेज वाले देव, मेरे सब कार्य सदा निर्विघ्न करें।
विष्णु सहस्रनाम का आरंभिक ध्यान-श्लोक: श्वेत वस्त्रधारी, चतुर्भुज, प्रसन्नमुख विष्णु का ध्यान, सब विघ्नों की शांति के लिए।