कबीर की साखी, शब्द, तथा रमैनी
कबीर पंथ सिखाता है कि तीन लोकों से परे सत्य का लोक सतलोक सतपुरुष का शाश्वत धाम है, जो केवल दीक्षित भक्ति द्वारा प्राप्य है।
दिव्य की आवरणकारी शक्ति
कबीर का दोहा: शरीर बार-बार मरता है, पर आशा और तृष्णा नहीं मरती। माया, मन और छोड़ने की साधना पर कबीर दोहावली का एक दोहा।
यह रविदास जी का एक भक्ति पद है, जो मिट्टी के बने मानव शरीर की नश्वरता और माया के मोह को समझाता है।