यह एक पारंपरिक भक्ति गीत (आरती) है जो भगवान राम की स्तुति में गाया जाता है। इसे मंदिरों और घरों में पूजा के अंत में दीपक लेकर घुमाते समय गाते हैं।
आरती के बाद गाई जाने वाली मराठी प्रार्थना: संत नामदेव का 'घालीन लोटांगण', समर्पण के श्लोक, हरे राम महामंत्र और गणपति का 'मोरया' जयघोष।
संत नामदेव विट्ठल से कहते हैं कि उनका नाम अमृत से भी मधुर है, फिर भी मन उसका स्वाद नहीं लेता: कीर्तन आरंभ होते ही नींद और चंचलता घेर लेती हैं।