यह एक भक्ति पद है जो चैतन्य महाप्रभु (गौरांग) के चरणों की महिमा का वर्णन करता है। इसमें बताया गया है कि जो गौरांग के नाम और लीला में लीन होता है, उसे प्रेम भक्ति प्राप्त होती है और वह राधा-कृष्ण की नित्य लीला का अधिकारी बनता है।
शिव की स्तुति का एक संस्कृत श्लोक: कपूर के समान गौर, करुणा के अवतार, जो भवानी सहित हृदय-कमल में सदा विराजते हैं।
सरस्वती को समर्पित दो पंक्तियों की प्रार्थना, जिसे विद्यार्थी पढ़ाई या विद्यारम्भ से पहले बोलते हैं और अध्ययन की सफलता माँगते हैं।
संत तुकाराम की विट्ठल से की गई संक्षिप्त प्रार्थना: वे एक ही वरदान माँगते हैं कि प्रभु का विस्मरण कभी न हो और संतों का संग मिले; मुक्ति या संपत्ति उनके लिए इससे बढ़कर नहीं।