सुब्रह्मण्य पञ्चरत्नम्: भगवान सुब्रह्मण्य (मुरुगन) की स्तुति के पाँच श्लोक और फल बताने वाला एक अन्तिम श्लोक, प्रत्येक शरण की प्रार्थना पर समाप्त।
यह भगवान सुब्रह्मण्य (कार्तिकेय) के 108 नामों की एक स्तुति है, जिसका पाठ भक्ति, ध्यान और मंगलकामनाओं के लिए किया जाता है।