अभिषेक
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
अनुष्ठानिक स्नान; अभिषेक
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'अभि' (की ओर) और 'सेक' (छिड़कना, डालना) से बना; देवता की मूर्ति या प्रतिष्ठित होने वाले व्यक्ति (जैसे राजा) को जल, दूध, शहद, या अन्य पवित्र पदार्थों से निरंतर धारा में स्नान कराने का अनुष्ठान।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
अभिषेक देखना स्वयं भक्तों हेतु एक ध्यान-अभ्यास माना जाता है — तरल का अटूट प्रवाह उस अटूट भक्ति-प्रवाह को दर्शाता है जो व्यक्ति के आंतरिक जीवन की विशेषता होनी चाहिए।