Bharat Devotion

अहंकार

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

'मैं' बनाने वाला

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

'अहम्' (मैं) और 'कार' (बनाने वाला) से बना; सांख्य दर्शन में, वह मनोवैज्ञानिक क्षमता जो व्यक्तिगत स्वत्व की भावना उत्पन्न करती है, 'मैं' को शेष अस्तित्व से पृथक करती है — एक आवश्यक कार्य जो सच्चे आत्मा के रूप में गलत समझे जाने पर बंधन बन जाता है।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

आध्यात्मिक साधना का उद्देश्य अहंकार को पूर्णतः नष्ट करना नहीं है, क्योंकि संसार में कार्य करने हेतु कुछ कार्यात्मक स्वत्व-भाव आवश्यक है, बल्कि इसकी पकड़ को ढीला करना है ताकि यह शाश्वत आत्मा के रूप में प्रच्छन्न न रहे।

अहंकार का उल्लेख इन लेखों में