अमृतबाणी
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
अमृत-वाणी
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'अमृत' (अमरता का रस) तथा 'बाणी' (वाणी) से निर्मित।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
गुरु रविदास जी की शिक्षाओं के संकलित ग्रंथ का शीर्षक, जिसे डेरा संत सरवन दास (डेरा बल्लां) द्वारा संकलित तथा विश्वभर के रविदासिया समुदायों तक पहुँचाने हेतु अनेक भाषाओं में अनुवादित किया गया।