अष्टांग योग
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
आठ अंगों वाला मार्ग
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'अष्ट' (आठ) + 'अंग' (अंग) से — पतंजलि का समाधि में परिणत होने वाला व्यवस्थित आठ-चरण मार्ग: यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, तथा समाधि।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
पश्चिम में लोकप्रिय आधुनिक मुद्रा-योग सामान्यतः केवल तृतीय अंग (आसन) को कवर करता है, जबकि शास्त्रीय अष्टांग योग शारीरिक मुद्रा को समाधि के परम लक्ष्य की ओर मात्र एक सोपान मानता है।