भक्ति योग
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
प्रेममय भक्ति का मार्ग
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'भज्' (साझा करना, आराधना करना) और 'योग' से बना; गीता के शास्त्रीय मार्गों में चौथा, जो बुद्धि या केवल कर्मकांड के बजाय प्रेम, समर्पण व भक्ति द्वारा दिव्यता तक पहुँचता है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
भक्ति योग को प्रायः चारों मार्गों में सबसे सुलभ कहा जाता है, क्योंकि यह विद्वत्ता या त्याग की माँग नहीं करता बल्कि केवल बिना शर्त प्रेम करने हेतु तैयार हृदय की माँग करता है।