गुण
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
गुण; तंतु
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत में 'तंतु' या 'गुण'; प्रकृति के तीन मौलिक गुण — सत्त्व (स्पष्टता), रजस (सक्रियता), तथा तमस (जड़ता) — जो शास्त्रीय योग के आधारभूत सांख्य दर्शन में वर्णित हैं।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
कोई भी व्यक्ति या क्षण पूर्णतः एक गुण नहीं होता — योगिक आत्म-निरीक्षण का अर्थ है यह देखना कि वर्तमान में कौन सा तंतु मन पर हावी है तथा उसे धीरे से सत्त्व की ओर पुनः मोड़ना।