जिन
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
विजेता
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'जि' (जीतना) से; जिन्होंने राग, द्वेष तथा समस्त कषायों पर पूर्ण विजय प्राप्त की है उनके लिए प्रयुक्त नाम — 'जैन' शब्द स्वयं इसी मूल से निकला है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
तीर्थंकर जिन कहलाते हैं, परंतु प्रत्येक आत्मा जिसने केवलज्ञान प्राप्त किया है वह जिन बन सकता है — यह किसी एक व्यक्ति का नाम नहीं, बल्कि प्राप्त की जा सकने वाली आध्यात्मिक उपलब्धि है।