करुणा
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
करुणा
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत/पालि 'करुणा' से — सभी प्राणियों के दुःख से मुक्त होने की कामना, मेत्ता (मैत्रीपूर्ण करुणा) से भिन्न, विशेष रूप से पीड़ा को दूर करने पर केंद्रित।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
करुणा मेत्ता, मुदिता, तथा उपेक्खा के साथ चार अपरिमेय गुणों (ब्रह्मविहार) में से एक है, तथा सबसे बढ़कर करुणा के बोधिसत्व अवलोकितेश्वर द्वारा मूर्तिमान है।