Bharat Devotion

करुणा

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

करुणा

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

संस्कृत/पालि 'करुणा' से — सभी प्राणियों के दुःख से मुक्त होने की कामना, मेत्ता (मैत्रीपूर्ण करुणा) से भिन्न, विशेष रूप से पीड़ा को दूर करने पर केंद्रित।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

करुणा मेत्ता, मुदिता, तथा उपेक्खा के साथ चार अपरिमेय गुणों (ब्रह्मविहार) में से एक है, तथा सबसे बढ़कर करुणा के बोधिसत्व अवलोकितेश्वर द्वारा मूर्तिमान है।

करुणा का उल्लेख इन लेखों में

सार्वभौमिक करुणा एवं आत्म-शुद्धि का सर्वोच्च मार्ग

उत्साही आत्मा, दिव्य इच्छा

संत कबीर के दोहे, गुरु ग्रंथ साहिब में संरक्षित उनके 541 पदों सहित, आग्रह करते हैं कि ईश्वर मंदिर या मस्जिद में नहीं, करुणा तथा सत्य में मिलते हैं।

शुद्धिकरण, नवीकरण तथा मठ-अनुष्ठान का तीन-दिवसीय तिब्बती नववर्ष, जिसकी जड़ें बौद्ध-पूर्व बॉन परंपरा में हैं तथा जो शताब्दियों में हिमालयी बौद्ध धर्म के केंद्रीय पर्व के रूप में ढला।

आंतरिक शुद्धि और सच्ची भक्ति

करुणामय प्रेम का उपदेश