कायक
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
ईमानदारी से किया जाने वाला शारीरिक श्रम ही सच्ची पूजा है
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
कन्नड़ 'ಕಾಯಕವೇ ಕೈಲಾಸ' — परिश्रम ही साक्षात् कैलाश (स्वर्ग) है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता — निष्ठापूर्वक श्रम करना ही ईश्वर की प्राप्ति है।