Bharat Devotion

खालसा

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

शुद्ध, ईश्वर का अपना

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

फारसी 'खालिस' (शुद्ध) से — गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा 1699 में स्थापित, अमृतधारी सिखों का अनुशासित समुदाय।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

खालसा की स्थापना पंज प्यारों की बलिदान-परीक्षित भावना से हुई, जिसने जातिगत भेद समाप्त कर प्रत्येक सिख को संत-सिपाही की पहचान दी।

खालसा का उल्लेख इन लेखों में

सिखों की विनती-प्रार्थना

पांच बाणियों का दैनिक पाठ और आध्यात्मिक साधना

खालसा की जन्मभूमि

पाँच ककार वे दृश्य धर्म-चिह्न हैं जिन्हें गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1699 में खालसा को प्रदान किया, और इनमें से प्रत्येक एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रतिबद्धता की जीवंत स्मृति है।

१६९९ में आनंदपुर साहिब में गुरु गोबिंद सिंह ने शीश की माँग की, फिर पंज प्यारों को जीवित प्रकट किया और खालसा तथा उसके पाँच ककारों की स्थापना की।

चौथे सिख गुरु, गुरु राम दास ने एक पवित्र सरोवर के चारों ओर उस नगर की स्थापना की, जो बाद में अमृतसर कहलाया। इस अमृत सरोवर को उनके पुत्र गुरु अर्जन देव ने स्वर्ण मंदिर के चारों ओर पूरा किया।