लंगर
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
बिना किसी भेदभाव के सभी के लिए निःशुल्क सामूहिक भोजन की व्यवस्था
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
फ़ारसी 'लंगर' (लंगर, यात्रियों हेतु धर्मशाला) से।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
गुरु नानक देव जी द्वारा जाति-भेद मिटाने तथा सार्वभौमिक समानता का उत्सव मनाने हेतु स्थापित।