लोक
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
लोक; अस्तित्व का क्षेत्र
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'लोक्' (देखना, अनुभव करना) से; पारंपरिक हिंदू ब्रह्मांडविज्ञान में चौदह लौकिक क्षेत्रों में से एक, भूलोक (पृथ्वी) से लेकर स्वर्गीय लोकों होते हुए सत्यलोक तक, तथा नीचे सात अधोलोकों तक फैला हुआ।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
ये लोक पारंपरिक रूप से भौतिक स्थानों के बजाय चेतना की उन अवस्थाओं के रूप में समझे जाते हैं जिनकी ओर व्यक्ति का कर्म स्वाभाविक रूप से आकर्षित होता है — बाह्य वास्तविकता जितना ही आंतरिक का मानचित्र।