Bharat Devotion

लोक

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

लोक; अस्तित्व का क्षेत्र

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

संस्कृत 'लोक्' (देखना, अनुभव करना) से; पारंपरिक हिंदू ब्रह्मांडविज्ञान में चौदह लौकिक क्षेत्रों में से एक, भूलोक (पृथ्वी) से लेकर स्वर्गीय लोकों होते हुए सत्यलोक तक, तथा नीचे सात अधोलोकों तक फैला हुआ।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

ये लोक पारंपरिक रूप से भौतिक स्थानों के बजाय चेतना की उन अवस्थाओं के रूप में समझे जाते हैं जिनकी ओर व्यक्ति का कर्म स्वाभाविक रूप से आकर्षित होता है — बाह्य वास्तविकता जितना ही आंतरिक का मानचित्र।

लोक का उल्लेख इन लेखों में

प्रकाश का पवित्र विज्ञान

कबीर की साखी, शब्द, तथा रमैनी

सूर्यदेव के प्रति कृतज्ञता का चार-दिवसीय पर्व, जो बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल में कठोर व्रत तथा नदी-तट पूजा के साथ मनाया जाता है।

कबीर पंथ सिखाता है कि तीन लोकों से परे सत्य का लोक सतलोक सतपुरुष का शाश्वत धाम है, जो केवल दीक्षित भक्ति द्वारा प्राप्य है।

अर्थ, धार्मिक महत्व और पवित्र परंपराएं

मकर राशि में सूर्य के प्रवेश तथा उत्तरायण के आरंभ का प्रतीक पर्व, जो पवित्र नदी-स्नान, पतंगबाजी तथा तिल-गुड़ के भोग के साथ सम्पूर्ण भारत में मनाया जाता है।