परमात्मा
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
परम आत्मा
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'परम' (सर्वोच्च) + 'आत्मा' (स्वयं/आत्मा) से — परम स्व जो प्रत्येक व्यक्तिगत आत्मा में व्याप्त तथा अंतर्निहित है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
प्रायः ब्रह्म या ईश्वर के पर्याय के रूप में प्रयुक्त, परमात्मा ईश्वर को प्रत्येक प्राणी के हृदय में विराजमान अंतरतम साक्षी के रूप में दर्शाता है, जैसा भगवद्गीता एवं उपनिषदों में वर्णित है।