परिक्रमा / प्रदक्षिणा
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
ईश्वर या मंदिर की दक्षिणावर्त दिशा में परिक्रमा करना
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'प्र' + 'दक्षिण' (दाहिनी ओर से चलना)।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
अपने जीवन के केंद्र में ईश्वर को स्थापित करने की भक्तिपूर्ण क्रिया।