सदाचार
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
सत् आचरण
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'सत्' (सत्य, अच्छा) और 'आचार' (आचरण) से बना; पंचाचारों में से एक — दैनिक जीवन में सत्य, शुद्धता, तथा न्यायसंगत आचरण का पालन।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
सदाचार जोर देता है कि आध्यात्मिक साधना को सामाजिक ईमानदारी से कभी अलग नहीं किया जाना चाहिए — एक शिवभक्त को व्यापार में तथा वाणी में समान रूप से ईमानदार होना चाहिए।