संन्यास
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
पूर्ण त्याग
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'सम्' (पूर्णतः) और 'न्यास' (त्यागना, फेंकना) से बना; चौथा तथा अंतिम आश्रम, जिसमें केवल मोक्ष की खोज में सभी सामाजिक संबंध, संपत्ति, तथा पहचान-चिह्न त्याग दिए जाते हैं।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
संन्यासी परंपरागत रूप से प्रतिज्ञा लेने से पूर्व अपना ही अंतिम संस्कार करते हैं, अपनी पुरानी सामाजिक पहचान के प्रति प्रतीकात्मक रूप से मरते हुए ताकि वे पूर्णतः केवल आध्यात्मिक सत्य हेतु जी सकें।