उपवास
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
पास में निवास करना (ईश्वर के)
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'उप' (निकट) और 'वास' (निवास) से बना; परंपरागत रूप से मात्र भोजन का त्याग नहीं बल्कि मन तथा इंद्रियों को ईश्वर के निकट लाने का अनुशासन, जिसमें उपवास उस आंतरिक निकटता हेतु शारीरिक सहारा प्रदान करता है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
यह व्युत्पत्ति उपवास को पूर्णतः पुनर्परिभाषित करती है — मुद्दा वंचना का अपने आप में महत्व नहीं बल्कि पाचन तथा भूख से ध्यान मुक्त करना है ताकि यह अधिक पूर्णता से ईश्वर पर टिक सके।