Bharat Devotion

उपवास

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

पास में निवास करना (ईश्वर के)

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

'उप' (निकट) और 'वास' (निवास) से बना; परंपरागत रूप से मात्र भोजन का त्याग नहीं बल्कि मन तथा इंद्रियों को ईश्वर के निकट लाने का अनुशासन, जिसमें उपवास उस आंतरिक निकटता हेतु शारीरिक सहारा प्रदान करता है।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

यह व्युत्पत्ति उपवास को पूर्णतः पुनर्परिभाषित करती है — मुद्दा वंचना का अपने आप में महत्व नहीं बल्कि पाचन तथा भूख से ध्यान मुक्त करना है ताकि यह अधिक पूर्णता से ईश्वर पर टिक सके।

उपवास का उल्लेख इन लेखों में

सूर्यदेव के प्रति कृतज्ञता का चार-दिवसीय पर्व, जो बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल में कठोर व्रत तथा नदी-तट पूजा के साथ मनाया जाता है।

आध्यात्मिक रहस्य, व्रत विधि एवं २४ एकादशियों का परिचय

संत कबीर के दोहे, गुरु ग्रंथ साहिब में संरक्षित उनके 541 पदों सहित, आग्रह करते हैं कि ईश्वर मंदिर या मस्जिद में नहीं, करुणा तथा सत्य में मिलते हैं।

अर्थ, धार्मिक महत्व और पवित्र परंपराएं

वर्ष का सबसे पवित्र जैन पर्व — आठ से दस दिनों का उपवास, शास्त्र-अध्ययन तथा आत्म-चिंतन, जो संवत्सरी तथा सार्वभौमिक क्षमा-याचना 'मिच्छामि दुक्कडम्' में परिणत होता है।

संध्याकाल की शिव आराधना एवं आध्यात्मिक रहस्य