सिख प्रार्थना का अर्थ, संरचना और आध्यात्मिक शक्ति
भाणे को सहर्ष स्वीकारना
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी से दैनिक उपदेश ग्रहण करना
सिख अरदास संगत की साझा प्रार्थना है, जो गुरु गोबिंद सिंह जी की 'वार श्री भगौती जी की' की पहली पउड़ी से आरंभ होकर सर्वत्र के कल्याण की याचना पर समाप्त होती है।