कृष्णाष्टकम्: श्रीकृष्ण की स्तुति के आठ श्लोक, प्रत्येक के अंत में 'कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्', और पाठ के फल का नौवाँ श्लोक।
यह आठ श्लोकों का स्तोत्र है, जिसमें भगवान अच्युत (विष्णु) के विभिन्न नामों से गुणगान करते हुए दुःखों से मुक्ति की प्रार्थना की गई है।
यह आठ श्लोकों का एक भजन है जो भगवान विष्णु के विभिन्न रूपों, विशेषकर श्रीकृष्ण और श्रीराम, की स्तुति करता है। इसे नियमित रूप से पढ़ने से भक्त की इच्छाएँ पूरी होती हैं और भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
यह आठ श्लोकों का एक स्तोत्र है जिसे श्रीधर वेंकटेश ने लिखा है। इसमें भगवान के नाम की शक्ति का वर्णन है, जो पापों को नष्ट करती है और संकट में सहायता करती है।
यह आठ श्लोकों का एक पवित्र स्तोत्र है जो भगवान शिव को एक बिल्वपत्र (बेलपत्र) अर्पित करने की महिमा का वर्णन करता है। इसे पढ़ने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और शिवलोक की प्राप्ति होती है।
यह आठ श्लोकों का एक भक्ति स्तोत्र है जो भगवान श्रीकृष्ण के दामोदर रूप की स्तुति करता है।
शिवलिंग की महिमा में आठ श्लोकों का स्तोत्र, जिसके नवें श्लोक में पाठ का फल, शिवलोक की प्राप्ति, बताया गया है।
यह आठ श्लोकों का एक भक्ति गीत है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के रूप, गुण, वेशभूषा, लीलाओं और उनसे जुड़ी हर वस्तु को 'मधुर' (मीठा) बताकर उनकी महिमा का गुणगान किया गया है।
श्रीनिवास आचार्य द्वारा रचित आठ श्लोक, जो वृन्दावन के षड्गोस्वामियों की भक्ति और तपस्या की स्तुति करते हैं।