अमृत
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
अमरता का जल
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'मृत' (मृत्यु) से पहले निषेधक 'अ' जुड़ने से बना; 1699 में गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा साजने हेतु खंडे-बाटे का अमृत तैयार किया।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
अमृत छकना खालसा में दीक्षा लेने की रस्म है, जिसमें सिख पंज ककार धारण करने और रहत मर्यादा पालन का प्रण लेता है।