अपरिग्रह
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
अस्वामित्व, अनासक्ति तथा संतोष
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'अ' (बिना) + 'परि' (चारों ओर) + 'ग्रह' (पकड़ना, संचय) से।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
लोभ, अत्यधिक उपभोक्तावाद तथा आसक्ति पर अंकुश लगाकर आत्मा को चिंता से मुक्त करता है।