बुद्धि
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
बुद्धि; विवेकपूर्ण ज्ञान
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'बुध्' (जानना, जागना) से; सांख्य तथा वेदांत में, मन की उच्चतर विवेकशील क्षमता जो निर्णय लेती है, तय करती है, तथा वास्तविक को अवास्तविक से पृथक करती है — आंतरिक साधन में मनस् (इंद्रिय-मन) से ऊपर स्थित।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
भगवद गीता साधक से आग्रह करती है कि वह अपनी बुद्धि को स्थिर ज्ञान (बुद्धि योग) में स्थापित करे, न कि उतार-चढ़ाव वाली भावनाओं तथा इंद्रिय आवेगों से इधर-उधर हिलता रहे।