चक्र
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
ऊर्जा का गतिशील चक्र अथवा केंद्र
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत धातु 'चक्' (गति करना/घूमना)।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
मूलाधार से सहस्रार तक स्थित सात सूक्ष्म ऊर्जा केंद्र, जहाँ चेतना का विस्तार होता है।