दर्शन
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
श्रद्धापूर्वक ईश्वर या संत के रूप का दर्शन करना
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत धातु 'दृश्' (देखना)।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
केवल नेत्रों से देखना नहीं, बल्कि हृदय में भगवान की उपस्थिति का साक्षात्कार करना।