धर्म
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
शिक्षा; यथार्थता
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'धृ' (धारण करना) से; बौद्ध धर्म में इसका अर्थ बुद्ध की शिक्षा और वास्तविकता का मूल सत्य दोनों है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
धर्म की शरण लेने का अर्थ है बुद्ध द्वारा बताए गए मार्ग को दुःख से मुक्ति के विश्वसनीय मानचित्र के रूप में स्वीकार करना।